
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती ।। आखिर अमित एजेंसी पर जिला औषधि विभाग क्यूं है मेहरबान।जब कोडीन युक्त कफ सिरप मामले में लाइसेंस को किया गया रद्द तो क्यूं नहीं दुकान को किया गया सील। आखिर कितने दवाओं की हुई बरामदगी और कितने लायसेंसों को किया गया रद्द,है बड़ा सवाल।
08 दिसंबर 25, उत्तर प्रदेश।
⭐ प्रोपराइटर ने ऊपर बने दुकान में दवाओं को किया शिफ्ट – सूत्र।
औषधि विभाग के मिलीभगत से फल फूल रहा है जिले में संचालित मेडिकल कारोबारियों का गोरख धंधा। कोडीन कफ सिरप मामले में प्रदेश स्तर पर कइयों के खिलाफ हो चुकी है एफआईआर। तो फिर केवल लाइसेंस रद्द करके जिले का औषधि विभाग क्यूं कर रहा है खानापूर्ति।
🔥 अमित एजेंसी के साथ सफेदपोशों का पूरा हाथ – सूत्र।
🏥 मेडिसिन हाउस में शिफ्ट की गई अमित एजेंसी की पूरी दवा -सूत्र।
कोडीन युक्त कफ सिरप मामले में छापामारी के दौरान एक और दुकान को भी किया गया सील। जिले में 15 से 25 वर्ष तक के युवाओं को कफ सिरप तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। ठंड में इसकी मांग और बढ़ गई है। मेडिकल स्टोरों पर कफ सिरप की धड़ल्ले से बिक्री की जा रही है। इसको लेकर विभाग अब सतर्क हो गया है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने एक होलसेलर का लाइसेंस निलंबित करते हुए जहां निरस्त कर दिया है, वहीं, संदिग्ध दुकानों की सूची तैयार कर वहां जांच कर रहा है। बताया कि शहर में चार होलसेल मेडिकल स्टोरों की निगरानी बहुत ही गोपनीय ढंग से जांच की जा रही है। एक दुकानदार पर केस भी दर्ज कराया जा चुका है। जिले के साथ ही पूर्वांचल के कई जिलों में कोडिन सीरप की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद शासन ने पूरे प्रदेश में सख्ती के आदेश दिए हैं।
नशे की लत का बड़ा स्रोत बने कोडिन युक्त कफ सीरप की अवैध बिक्री की आशंका में ड्रग विभाग ने थोक दवा बाजार साहू मार्केट गांधीनगर में दुकानदारों के यहां छापा मारा। जिसमें एक दुकानदार के यहां बिक्री स्टाॅक संदिग्ध मिला, नोटिस जारी करते हुए लाइसेंस निलंबित कर दिया। वहीं, बाद अमित मेडिकल का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। इससे पहले शासन के निर्देश पर मेसर्स गोयल फार्मा पर छापेमारी हुई।
संदिग्ध मामले में दुकानदान पर केस दर्ज कराते हुए लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया। इसके अलावा चार बड़े दवा कारोबारियों को नोटिस थमाया है। इसमें गांधीनगर के साथ पांडेय बाजार समेत अन्य जगहों के होलसेल कारोबारी हैं। इसके अलावा कोडिन युक्त सीरप की खरीद-बिक्री से जुड़े सभी अभिलेख खंगाले जा रहे हैं। बिल बुक, स्टॉक रजिस्टर, जीएसटी रिटर्न से लेकर कंप्यूटराइज्ड रिकॉर्ड तक की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
बताया गया कि बस्ती समेत पूर्वांचल के कई जिलों में कोडिन सीरप की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद शासन ने पूरे प्रदेश में सख्ती के आदेश दिए हैं। शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों के कई मेडिकल स्टोरों से कोडिन युक्त सीरप और नारकोटिक्स की दवाएं बेची जा रही हैं। ऐसे में सरकार द्वारा इसे रोकने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। कई फर्मों द्वारा कोडिन सीरप को सामान्य कफ सीरप की आड़ में बेचा जा रहा है।
ड्रग इंस्पेक्टर अरविंद कुमार ने बताया कि इन चार कारोबारियों से वर्ष 2024-2025 का कोडिन युक्त सीरप की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड तीन दिन के अंदर जमा करने को कहा गया है। पहले यह कारोबारी एक अन्य ब्रांड के नाम से कोडिन सीरप की खुली बिक्री करते थे, लेकिन करीब दो साल पहले केंद्र सरकार ने सीरप पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद भी बाजार में अलग-अलग ब्रांड नामों से कोडिन युक्त सीरप की सप्लाई जारी रही।
अब मिले रिकॉर्ड के आधार पर लाइसेंस निलंबन से लेकर आपराधिक मुकदमा तक की कार्रवाई होगी। ड्रग विभाग ने चेतावनी दी है कि कोडिन सीरप की अवैध बिक्री करने वाले किसी भी दवा कारोबारी को बख्शा नहीं जाएगा। कोडिन सीरप को लेकर चार दवा कारोबारियों को सूचीबद्ध किया गया है। उनके अभिलेख भी खंगाले गए है। सभी को नेाटिस जारी कर दो साल का कोडिन सीरप का रिकार्ड मांगा गया है। वहीं, सख्ती के बाद दवा दुकानदारों में खलबली है। नशीली दवा को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहे हैं।








